मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कलेक्टरों को दिए विस्तृत निर्देश जन शिकायतों के समयबद्ध निराकरण पर जोर April 17, 2026
साल्हे भट्टी में शिकारी का चेहरा बेनकाब: जिसे लोग समझ रहे थे बाघ, वह निकला तेंदुआ; ट्रैप कैमरे में कैद हुई तस्वीर April 16, 2026
औंधी के वनांचल में खामोश दहशत का पहरा: वारकुंजी-साल्हेभट्टी के जंगलों में दो मवेशियों का शिकार, पगमार्कों ने उलझाई विभाग की गुत्थी April 15, 2026
शासकीय मर्यादा तार-तार: नवीन समितियों के शुभारंभ में विधायक व निर्वाचित प्रतिनिधियों की उपेक्षा से उपजा जनाक्रोश April 15, 2026
सरखेड़ा राशन दुकान में 45 क्विंटल चावल के ‘रहस्यमयी लोप’ ने खोला भ्रष्टाचार का बड़ा गलियारा, 108 परिवारों के निवाले पर संकट April 9, 2026
राशन माफिया ने गरीबों के निवाले पर डाला डाका, सरखेड़ा में 45 क्विंटल चावल का ‘रहस्यमयी लोप’, चोरी की आड़ में गबन छिपाने की साजिश हरिभूमि न्यूज | औंधी छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्रों में गरीबों के हक पर डाका डालने वाले राशन माफिया के हौसले एक बार फिर बुलंद नजर आ रहे हैं, जिसका ताज़ा प्रमाण मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के अंतिम छोर पर बसे ग्राम सरखेड़ा में देखने को मिला है। यहाँ प्रज्ञा सील स्व-सहायता समूह द्वारा संचालित शासकीय उचित मूल्य की दुकान से लगभग 45 क्विंटल सरकारी चावल रहस्यमयी तरीके से गायब होने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। पूरी घटना की कड़ियाँ उस समय जुड़नी शुरू हुईं जब एक लंबे अंतराल के बाद राशन दुकान का ताला खोला गया और स्टॉक के आंकड़ों ने सभी को हैरत में डाल दिया। रिकॉर्ड के मुताबिक दुकान के भीतर 120 कट्टे सुरक्षित होने का दावा किया गया था, लेकिन जब 26 मार्च को दुकान का शटर उठा तो मौके पर मात्र 30 कट्टे ही शेष मिले। यह घटनाक्रम इसलिए भी संदिग्ध है क्योंकि यह दुकान 19 मार्च से 26 मार्च तक बंद थी और इसी ‘डेथ पीरियड’ के दौरान इतनी बड़ी मात्रा में अनाज का पार होना किसी सोची-समझी साजिश की ओर इशारा करता है। जानकारों का मानना है कि 45 क्विंटल चावल को बिना किसी बड़े वाहन और संगठित गिरोह के हटाना मुमकिन नहीं है, जो इस पूरी वारदात को और भी ज्यादा संदेहास्पद बनाता है। इस गंभीर मामले को लेकर ग्राम पंचायत सरखेड़ा में सरपंच, सचिव और समस्त ग्रामीणों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें भ्रष्टाचार की कई नई परतें उधड़कर सामने आई हैं। बैठक में यह विस्फोटक खुलासा हुआ कि शासन की ओर से राशन का कोटा तो हमेशा पूर्णतः भेजा जाता था, लेकिन वितरण करने वालों का कहना है कि दुकान तक कभी पूरा चावल पहुंचता ही नहीं था। यह विरोधाभास साफ तौर पर दर्शाता है कि आपूर्ति और वितरण के बीच में कोई बहुत बड़ा झोल है, जिसे ‘चोरी’ का नाम देकर दबाने की कोशिश की जा रही है। ग्रामीणों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए बताया कि सरखेड़ा के लगभग 108 कार्डधारियों को मार्च महीने से अब तक राशन नहीं मिला है, जिससे उनके सामने भूखमरी की स्थिति निर्मित हो गई है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि स्टॉक में हुई इस भारी कमी को जानबूझकर चोरी बताया जा रहा है ताकि पिछले कई महीनों से किए जा रहे गबन के पाप को ढका जा सके। मामले की गंभीरता को देखते हुए मानपुर के खाद्य निरीक्षक हेमंत नायक ने भी मौके पर पहुंचकर जांच की, जिसमें यह पाया गया कि दुकान का स्टॉक रजिस्टर तक मेंटेन नहीं था। बिना आधिकारिक रिकॉर्ड के राशन का भंडारण और वितरण करना सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है, फिर भी विभाग की आंखें अब तक बंद थीं। अधिकारियों द्वारा अब केवल स्पष्टीकरण नोटिस भेजने की बात कही जा रही है, जिससे ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। सरखेड़ा की इस घटना ने वनांचल के उन जख्मों को फिर से हरा कर दिया है जो जिले के ही साल्हेभट्टी पंचायत में हुए चर्चित राशन घोटाले के दौरान मिले थे। साल्हेभट्टी में भी इसी तरह का खेल खेला गया था और अंततः शासन को दोषी विक्रेता का लाइसेंस निरस्त करना पड़ा था। आज सरखेड़ा के ग्रामीण भी वही सवाल पूछ रहे हैं कि क्या प्रशासन साल्हेभट्टी की तर्ज पर यहाँ भी त्वरित और कड़ी कार्रवाई करेगा या फिर रसूखदार माफियाओं को बचाने का प्रयास किया जाएगा। भौगोलिक दृष्टि से देखा जाए तो औंधी क्षेत्र महाराष्ट्र बॉर्डर पर स्थित होने और जिला मुख्यालय से अत्यधिक दूरी पर होने के कारण हमेशा प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार रहा है। अधिकारियों का नियमित दौरा न होने के कारण सीमावर्ती इलाकों में राशन माफिया बेखौफ होकर गरीबों के निवाले पर डाका डाल रहे हैं। फिलहाल औंधी थाना प्रभारी सतीश साहू मामले की सूक्ष्मता से जांच कर रहे हैं और पुलिस की रडार पर वे लोग हैं जिन्होंने 19 मार्च को दुकान बंद होते समय जिम्मेदारी संभाली थी। यदि जांच में यह पाया गया कि 19 मार्च को ही स्टॉक कम था, तो यह सीधे तौर पर एक बड़े राशन घोटाले की पुष्टि करेगा। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस ‘रहस्यमयी लोप’ के पीछे छिपे असली किरदारों तक कब तक पहुँच पाता है और 108 पीड़ित परिवारों को उनका हक कब मिलता है। April 9, 2026
नौनिहाल छात्रवृत्ति ने संवारी श्रमिक बच्चों की राह, मोहला-मानपुर जिले ने लक्ष्य से तीन गुना अधिक हासिल की उपलब्धि April 8, 2026