औंधी CG LIVE NEWS 24 : छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के वनांचल क्षेत्र औंधी में वन्यजीव और इंसानों के बीच संघर्ष की आहट अब तेज होने लगी है। बुधवार को औंधी बीट के अंतर्गत आने वाले ग्राम वारकुंजी और साल्हे भट्टी के मध्य स्थित सघन जंगलों में एक हिंसक वन्यजीव ने दो गाय के बछड़ों को अपना शिकार बनाकर क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। इस घटना ने न केवल पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि पूरे प्रशासनिक अमले को भी अलर्ट मोड पर ला खड़ा किया है। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम सक्रिय हुई और मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्चाधिकारियों ने स्वयं मोर्चा संभाल लिया है।
आज 15 अप्रैल को शाम ठीक 4:00 बजे मानपुर SDO अजय सिंह राजपूत अपनी टीम के साथ साल्हे भट्टी के उस दुर्गम वन क्षेत्र में पहुँचे जहाँ शिकार की वारदात हुई थी। उन्होंने बारीकी से घटनास्थल का मुआयना किया और वहां मौजूद साक्ष्यों को एकत्रित करवाया। निरीक्षण के दौरान शिकारी के पैरों के निशान यानी पगमार्क भी बरामद किए गए, लेकिन इन्हीं निशानों ने विभाग के सामने एक बड़ी तकनीकी चुनौती पेश कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, मौके पर मिले पदचिह्नों का आकार एक सामान्य वयस्क बाघ के पंजों की तुलना में काफी छोटा पाया गया है। इसी पेंच के कारण वन विभाग फिलहाल आधिकारिक तौर पर इसे ‘बाघ’ घोषित करने से बच रहा है।
निरीक्षण के पश्चात SDO अजय सिंह राजपूत ने स्पष्ट किया कि पगमार्क छोटे होने के कारण अभी पूरी तरह से यह कहना संभव नहीं है कि यह हमला बाघ द्वारा ही किया गया है। विभाग इस संभावना की भी जांच कर रहा है कि क्या यह कोई तेंदुआ है या फिर कोई बाघ का शावक जो अपनी नई टेरिटरी की तलाश में इस ओर भटक आया है। जब तक ठोस साक्ष्य या स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आ जाती, तब तक विभागीय स्तर पर इसकी पुष्टि करना जल्दबाजी होगी। इसी अनिश्चितता को दूर करने के लिए DFO मोहला-मानपुर दिनेश पटेल के कुशल निर्देशन में अब आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। विभाग ने साल्हे भट्टी और वारकुंजी के संभावित रास्तों और शिकार वाले स्थलों के आसपास ट्रैप कैमरे इंस्टॉल कर दिए हैं ताकि शिकारी की पहचान सुनिश्चित की जा सके।
उल्लेखनीय है कि इस पूरे क्षेत्र में दहशत का यह दौर कोई नया नहीं है। पिछले साल दिसंबर 2025 से ही वनांचल के गांवों में वन्यजीव की आहट महसूस की जा रही है। नवागढ़ से शुरू हुआ यह सिलसिला अब साल्हे भट्टी तक पहुँच चुका है और अब तक करीब आधा दर्जन मवेशी इस अज्ञात शिकारी का निवाला बन चुके हैं। लगातार हो रहे हमलों के कारण ग्रामीणों में भय व्याप्त है, क्योंकि अब शिकारी रिहायशी बस्तियों के बेहद करीब तक पहुँचने लगा है। वन विभाग ने सुरक्षा के दृष्टिकोण से प्रभावित गांवों में रेड अलर्ट जारी कर दिया है और मुनादी के जरिए लोगों को हिदायत दी गई है कि वे शाम के समय जंगलों की ओर रुख न करें और अपने मवेशियों को बाड़े के भीतर सुरक्षित रखें। फिलहाल, पूरा जिला प्रशासन उन ट्रैप कैमरों की रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहा है, जिससे इस रहस्यमयी शिकारी का सच सामने आ सके।

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