मोहला-मानपुर – CG LIVE NEWS 24 : मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के औंधी वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम साल्हे भट्टी में पिछले कुछ दिनों से जिस शिकारी वन्यजीव की दहशत बनी हुई थी, उसकी गुत्थी अब पूरी तरह से सुलझ गई है। वारकुंजी और साल्हे भट्टी के जंगलों में मवेशियों का शिकार करने वाला हिंसक जानवर बाघ नहीं, बल्कि एक तेंदुआ है। इस बात की पुष्टि तब हुई जब वन विभाग द्वारा लगाए गए अत्याधुनिक ट्रैप कैमरों में शिकारी की साफ़ तस्वीरें और उसकी गतिविधियां रिकॉर्ड की गईं। गौरतलब है कि साल्हे भट्टी के ग्रामीण पिछले कई दिनों से एक बड़े शिकारी की आहट से सहमे हुए थे और क्षेत्र में हो रहे लगातार हमलों के बाद इसे बाघ का आतंक माना जा रहा था, लेकिन अब कैमरा फुटेज सामने आने के बाद पहचान को लेकर चल रही सभी अटकलों पर पूरी तरह से विराम लग गया है।
इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम पर मानपुर SDO अजय सिंह राजपूत ने CG LIVE NEWS 24 से विशेष चर्चा करते हुए बताया कि साल्हे भट्टी क्षेत्र में दो बछड़ों के शिकार के बाद से ही विभाग मुस्तैद था। शुरुआती जांच में जब घटनास्थल पर पगमार्क यानी पदचिह्न देखे गए थे, तो उनका आकार वयस्क बाघ की तुलना में छोटा पाया गया था, जिससे विभाग को पहले ही तेंदुए के सक्रिय होने का संदेह हो गया था। इसी संदेह की पुष्टि के लिए DFO दिनेश पटेल के मार्गदर्शन में साल्हे भट्टी के जंगलों में अलग-अलग रणनीतिक स्थानों पर ट्रैप कैमरे लगाए गए थे। बीती रात इन कैमरों के फुटेज खंगालने पर एक तंदुरुस्त तेंदुए की तस्वीरें विभाग के हाथ लगी हैं, जो मवेशियों के शिकार वाले क्षेत्र के आसपास ही विचरण कर रहा था।
शिकारी की पहचान स्पष्ट होने के बाद अब वन विभाग के सामने अगली चुनौती इस तेंदुए की मूवमेंट पर लगातार नज़र रखने की है। SDO अजय सिंह राजपूत ने जानकारी दी कि तेंदुआ काफी फुर्तीला और आक्रामक नजर आ रहा है, जो अक्सर झाड़ियों में छिपकर या पेड़ों पर चढ़कर घात लगाकर हमला करने में माहिर होता है। इसी खतरे को देखते हुए वन विभाग की टीम अब इस बात पर विशेष ध्यान दे रही है कि तेंदुआ रिहायशी इलाकों या बस्तियों की ओर रुख न करे। विभाग के कर्मचारी और वन रक्षक साल्हे भट्टी और आसपास के क्षेत्रों में लगातार गश्त कर रहे हैं और ग्रामीणों को हर संदिग्ध हलचल के प्रति सचेत रहने की सलाह दी जा रही है।
तस्वीर सामने आने के बाद विभाग ने इलाके में रेड अलर्ट जारी कर दिया है और ग्रामीणों से अपील की है कि वे इस स्थिति को बिल्कुल भी हल्के में न लें। चूंकि तेंदुआ आबादी वाले क्षेत्रों के बेहद करीब तक पहुँचने की क्षमता रखता है, इसलिए ग्रामीणों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे शाम ढलने के बाद जंगलों की ओर बिल्कुल न जाएं और अपने मवेशियों को सुरक्षित और मजबूत बाड़ों में ही बांधें। विशेषकर छोटे बच्चों को घरों के भीतर रखने और रात में बाहर निकलते समय टॉर्च व समूह का सहारा लेने को कहा गया है। विभाग ने उन पशुपालकों को भी आश्वस्त किया है जिनके मवेशियों का शिकार हुआ है, उनके मुआवजे की कागजी कार्यवाही तेजी से पूरी की जा रही है ताकि उन्हें जल्द राहत मिल सके। फिलहाल, वन विभाग के कैमरे और टीमें साल्हे भट्टी के जंगलों में डेरा डाले हुए हैं और तेंदुए की हर हरकत पर पैनी नज़र रखी जा रही है।

Users Today : 351
Users Yesterday : 1033
Total views : 140051