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शासकीय मर्यादा तार-तार: नवीन समितियों के शुभारंभ में विधायक व निर्वाचित प्रतिनिधियों की उपेक्षा से उपजा जनाक्रोश

मोहला-मानपुर। जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी के तीनों विकासखंडों में 15 अप्रैल को नवीन सहकारी समितियों का शुभारंभ उत्साह के साथ किया गया, लेकिन इस सरकारी आयोजन ने उस वक्त विवाद का रूप ले लिया जब स्थानीय विधायक और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की घोर अनदेखी की गई। नवीन समितियों के शुरू होने से क्षेत्र के किसानों को खाद, बीज और धान उपार्जन में बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद है, किंतु प्रोटोकॉल के उल्लंघन और राजनीतिक भेदभाव ने इस उल्लास को विवादों में घेर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के वर्चुअल जुड़ाव के साथ शुरू हुए इस कार्यक्रम में मानपुर विकासखंड की स्थिति सबसे अधिक तनावपूर्ण रही, जहाँ कांग्रेस समर्थित जनप्रतिनिधियों को न बुलाए जाने से कार्यकर्ताओं में भारी रोष देखा गया।

विवाद का मुख्य केंद्र दिघवाड़ी की नवीन सेवा सहकारी समिति रही, जहाँ क्षेत्र की जनपद अध्यक्ष पुष्पा मंडावी स्वयं कार्यक्रम में मौजूद थीं, किंतु उन्हें मुख्य अतिथि का सम्मान देने के बजाय भाजपा संगठन की नेत्री संगीता मिश्रा को मुख्य मंच पर बिठाया गया। एक चुनी हुई जनप्रतिनिधि के स्थान पर संगठन के पदाधिकारी को तवज्जो देना क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसी तरह मोहला-मानपुर विधायक इंद्रशाह मंडावी को भी किसी भी केंद्र पर आमंत्रित नहीं किया गया, जिसे कांग्रेस ने लोकतंत्र की हत्या और निर्वाचित प्रतिनिधियों का अपमान करार दिया है। टोहे और भावसा जैसी समितियों में भी यही आलम रहा, जहाँ जिला पंचायत सदस्य सुशीला भंडारी और जनपद उपाध्यक्ष देवानंद कौशिक ने शाखा प्रबंधकों को आड़े हाथों लिया और कार्यक्रम स्थल पर ही तीखे सवाल-जवाब किए।

हैरानी की बात यह रही कि सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने शासकीय प्रोटोकॉल का पालन करने के बजाय कथित तौर पर भाजपा द्वारा जारी प्रभारियों की सूची को ही फाइनल मान लिया। जहाँ समितियों में भाजपा नेता जैसे तुका राम सहारे, प्रवीण मंडावी, रेणु टांडिया,  भोजेश शाह मंडावी राजहंश मंडावी जटाशंकर मिश्रा और अन्य पदाधिकारियों का बोलबाला रहा, वहीं सहकारिता विभाग के सभापति तक को न्योता नहीं दिया गया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आरोप है कि भाजपा सरकार जानबूझकर उन कार्यों का श्रेय लेना चाहती है जो पूर्ववर्ती सरकार के समय शुरू किए गए थे। विधायक प्रतिनिधि ऋषभ ठाकुर, उपेंद्र मिश्रा, आबिद खान और अन्य नेताओं ने इस कृत्य को शर्मनाक बताते हुए उच्च स्तर पर शिकायत करने की चेतावनी दी है।

इस पूरे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए विधायक इंद्रशाह मंडावी ने कहा कि शासकीय कार्यक्रमों में चुने हुए प्रतिनिधियों की अनदेखी करना भाजपा की किसान विरोधी मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने नई सोसायटियों को शुरू करने में 17 साल लगा दिए और अब श्रेय लेने के लिए लोकतांत्रिक परंपराओं को ताक पर रख रही है। दूसरी ओर, विवाद बढ़ता देख जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मानपुर के शाखा प्रबंधक पी.आर. जुरेशीया ने अपनी सफाई पेश की है। उन्होंने आमंत्रण में हुई इस गंभीर चूक के लिए सार्वजनिक रूप से खेद प्रकट किया है और भरोसा दिलाया है कि भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति नहीं होगी। बहरहाल, इस घटनाक्रम ने जिले की राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कड़वाहट को और बढ़ा दिया है।

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