October 28, 2026

ऐप डाउनलोड करें

लाइव टीवी

इमलीछापर-गेवरा रेलवे स्टेशन मार्ग स्ट्रीट लाइट से हुआ रोशनसीएसआर मद से 1 करोड़ 89 लाख 99 हजार रुपये की तकनीकी स्वीकृति; भारी वाहनों सहित राहगीरों को मिलेगी सुविधा साइकिल के पहियों पर स्कूल तक पहुंचते सपनेमुख्यमंत्री सरस्वती साइकिल योजना से कुम्हारीसानी की बेटियों के लिए हायर सेकेंडरी स्कूल की राह हुई सुगम मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत कोरबा जिले के वरिष्ठ नागरिकों को मिलेगा तीर्थ यात्रा का अवसर 3 नवंबर तक आमंत्रित किए गए आवेदन *बालोद का जिला अस्पताल बना सिर्फ रेफर सेंटर, करोड़ों की मशीनें खा रही धूल, युवा कांग्रेस ने गेट पर शव रखकर किया प्रदर्शन* चक्रवात ‘अर्नब’ के प्रभाव से वर्षा की संभावना को देखते हुए सभी विभाग अलर्ट मोड में रहें – कलेक्टर निचले इलाकों की निगरानी, राहत शिविरों की तैयारी, *दल्ली-बालोद मार्ग पर नया टोल प्लाजा शुरू, स्थानीय लोगों को टोल टैक्स में छूट की मांग, पालिका अध्यक्ष तोरण साहू ने मुख्य अभियंता को सौंपा ज्ञापन*
इमलीछापर-गेवरा रेलवे स्टेशन मार्ग स्ट्रीट लाइट से हुआ रोशनसीएसआर मद से 1 करोड़ 89 लाख 99 हजार रुपये की तकनीकी स्वीकृति; भारी वाहनों सहित राहगीरों को मिलेगी सुविधा साइकिल के पहियों पर स्कूल तक पहुंचते सपनेमुख्यमंत्री सरस्वती साइकिल योजना से कुम्हारीसानी की बेटियों के लिए हायर सेकेंडरी स्कूल की राह हुई सुगम मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत कोरबा जिले के वरिष्ठ नागरिकों को मिलेगा तीर्थ यात्रा का अवसर 3 नवंबर तक आमंत्रित किए गए आवेदन *बालोद का जिला अस्पताल बना सिर्फ रेफर सेंटर, करोड़ों की मशीनें खा रही धूल, युवा कांग्रेस ने गेट पर शव रखकर किया प्रदर्शन* चक्रवात ‘अर्नब’ के प्रभाव से वर्षा की संभावना को देखते हुए सभी विभाग अलर्ट मोड में रहें – कलेक्टर निचले इलाकों की निगरानी, राहत शिविरों की तैयारी, *दल्ली-बालोद मार्ग पर नया टोल प्लाजा शुरू, स्थानीय लोगों को टोल टैक्स में छूट की मांग, पालिका अध्यक्ष तोरण साहू ने मुख्य अभियंता को सौंपा ज्ञापन*

**मुस्लिम समुदाय द्वारा गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग का समर्थन_ छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा*

*दल्ली राजहरा। छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा (छमुमो) एवं छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ, दल्ली राजहरा ने मुस्लिम समाज द्वारा गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किए जाने की मांग का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार से इस संबंध में स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की है। संगठन ने कहा कि यदि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) वास्तव में गाय संरक्षण के मुद्दे को लेकर गंभीर है और इसे केवल राजनीतिक विषय नहीं मानती, तो गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने में हो रही देरी पर जवाब देना चाहिए। छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ के अध्यक्ष सोमनाथ उइके ने कहा कि मुस्लिम समाज की गाय को राष्ट्रीय पशु बनाए जाने की मांग से ये स्पष्ट होता है कि मुस्लिम समुदाय, हिंदूवादी संगठनों के साथ चलने का सांकेतिक पहल कर रही है, ऐसे में में हिंदूवादी संगठनो को आगे आकर ,सरकार को इनकी मांगो का पूर्ण समर्थन करना चाहिए ये केवल एक समुदाय की मांग नहीं ये पूरे राष्ट्र की मांग है ,मुस्लिम समाज हमेशा आम जनता के साथ मिलकर चलना चाहती है,लेकिन तथाकथित सरकार हमेशा इनके ऊपर हमेशा एक विशेष टैग लगाकर इनको बदनाम करने की कोशिश कर, वोट बैंक की राजनीति करती है ,गाय भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि संस्कृति और पशुधन व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार रही है। इसलिए यदि सरकार इस विषय पर ईमानदार है, तो उसे केवल चुनावी मंचों और राजनीतिक भाषणों तक सीमित न रहकर ठोस कदम उठाने चाहिए।मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्री जनक लाल ठाकुर ने यह भी कहा कि केवल प्रतीकात्मक घोषणाओं से समस्या का समाधान नहीं होगा। सरकार को आवारा पशुओं की बढ़ती समस्या, गौशालाओं की स्थिति, पशुपालकों की आर्थिक परेशानियों तथा पशु चिकित्सा सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दों पर भी गंभीरता से काम करना होगा। गाय संरक्षण का मुद्दा किसी एक धर्म या समुदाय का नहीं, बल्कि किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण समाज से जुड़ा व्यापक सामाजिक एवं आर्थिक विषय है। यदि भाजपा सरकार इस मुद्दे पर राजनीति नहीं कर रही है, तो उसे जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने के संबंध में स्पष्ट और ठोस पहल करनी चाहिए।गाय संरक्षण के नाम पर देशभर में करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन कई स्थानों पर गौशालाओं की वास्तविक स्थिति चिंताजनक दिखाई देती है। गौशालाओं के संचालन, पशुओं के चारे, चिकित्सा और रखरखाव के नाम पर भारी खर्च दर्शाया जाता है, जबकि जमीनी स्तर पर अनेक गौशालाओं में पशुओं को पर्याप्त भोजन, स्वच्छ वातावरण और उचित उपचार तक उपलब्ध नहीं हो पाता। इससे पशु कल्याण की व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।**छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के गुरूर क्षेत्र का कारहीभदर तथा डौंडीलोहारा क्षेत्र का खेरथा बाजार लंबे समय से कृषि और पशुपालन से जुड़े ग्रामीणों के आर्थिक एवं सामाजिक जीवन का हिस्सा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन बाजारों का ऐतिहासिक महत्व कृषि कार्यों के लिए पशुओं की खरीद-बिक्री से जुड़ा रहा है। ऐसे में हिंदूवादी संगठन जो इन बाजारों का विरोध कर इनको बंद करने की मांग कर रही है उनको राय बनाने से पहले उसके सामाजिक और ऐतिहासिक संदर्भ समझ लेना चाहिए, इन बाजारों को बंद करने के बजाए पशुओं के संरक्षण और राष्ट्रीय पशु घोषित किए जाने पर इन संगठनों को काम करना चाहिए।

Leave a Comment

और पढ़ें
1
Did you like our Portal?

Did you like our Portal?

राज्य चुनें