औंधी/मोहला-मानपुर: सरगुजा जिले के सीतापुर में भाजपा विधायक और नायब तहसीलदार के बीच हुआ विवाद अब पूरे छत्तीसगढ़ में बड़ा मुद्दा बन चुका है। इस घटना के विरोध में प्रदेशभर के तहसीलदार और नायब तहसीलदार अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। इस राज्यव्यापी आंदोलन का सीधा असर अब मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के औंधी में भी देखने को मिल रहा है। तहसील कार्यालय में अधिकारियों के न होने से पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ है, जिससे दूर-दराज के गांवों से अपने काम के लिए आने वाले ग्रामीणों को मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।यह पूरा विवाद मैनपाट के राजापुर उप-तहसील कार्यालय से शुरू हुआ, जहां सीतापुर के भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो की चचेरी बहन सीमा धनकी एक पैरोल से जुड़े कागजात पर दस्तखत कराने राजापुर के नायब तहसीलदार तुषार माणिक के दफ्तर पहुंची थीं। नायब तहसीलदार के मुताबिक, दस्तावेज अधूरे थे और उस समय ऑफिस का बाबू भी मौजूद नहीं था, इसलिए उन्होंने महिला को अगले दिन आने की बात कही। इसके बाद महिला ने अधिकारी पर बदतमीजी करने का आरोप लगाते हुए अपने भाई विधायक रामकुमार टोप्पो से शिकायत कर दी। आरोप है कि इसके बाद विधायक और उनके समर्थकों ने नायब तहसीलदार को बुलाकर उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की, जिससे उनके कपड़े तक फट गए। फिलहाल इस मामले में पुलिस ने विधायक और तहसीलदार दोनों पक्षों की शिकायत पर क्रॉस एफआईआर दर्ज कर ली है।इस घटना से आक्रोशित छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ के बैनर तले सभी राजस्व अधिकारी हड़ताल पर बैठ गए हैं। आंदोलनकारी तहसीलदारों की मुख्य मांग है कि नायब तहसीलदार तुषार माणिक के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार करने वाले आरोपी भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके समर्थकों पर तत्काल कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही अधिकारियों ने सरकार से ड्यूटी के दौरान सुरक्षा की पुख्ता गारंटी मांगी है, ताकि वे बिना किसी राजनीतिक दबाव या डर के अपना काम कर सकें।तहसीलदार और नायब तहसीलदार राजस्व प्रशासन की मुख्य कड़ी होते हैं, जिनके हड़ताल पर जाने से आम जनता की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। दफ्तरों में काम ठप होने की वजह से छात्रों और युवाओं के जरूरी जाति, आय और निवास प्रमाण-पत्र नहीं बन पा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ किसानों की जमीन से जुड़े महत्वपूर्ण काम जैसे सीमांकन, नामांतरण, फौती-बंटवारा और कोर्ट केस की सुनवाई पूरी तरह अटक गई है। कर्मचारी संगठनों का साफ कहना है कि जब तक उनकी मांगों को पूरा करते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक उनकी यह अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी।















