औंधी । छत्तीसगढ़ सरकार एक तरफ जहां प्रदेश भर में ‘सुशासन तिहार’ मनाकर विकास और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं जमीनी हकीकत में सरकारी सिस्टम पूरी तरह से वेंटिलेटर पर नजर आ रहा है। जिले के अंतिम छोर पर बसे औंधी तहसील के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) से एक ऐसी भयावह और चिंताजनक तस्वीर सामने आई है, जिसने स्वास्थ्य विभाग के तमाम दावों की पोल खोलकर रख दी है। इस अस्पताल की स्थिति वर्तमान में इतनी नाजुक और बदतर हो चुकी है कि यहाँ आने वाले मरीजों का अब सिर्फ भगवान ही मालिक है। 18 मई को सोमवार के दिन जब औंधी का साप्ताहिक बाजार था और दूर-दराज के गांवों से भारी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ उमड़ी थी, ठीक उसी समय ‘CG LIVE NEWS 24’ की टीम जमीनी हकीकत जानने इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची। बाजार के दिन जब अस्पताल में पैर रखने की जगह नहीं होनी चाहिए थी और डॉक्टरों की सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब वहां के हालात बेहद नाजुक और डरावने नजर आए, जो सीधे तौर पर पूरी व्यवस्था को मुंह चिढ़ा रहे थे।सरकारी नियमों और मापदंडों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर इलाज देने के लिए एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सा अधिकारी, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन और अन्य सहायकों को मिलाकर लगभग 15 कर्मचारियों का पूरा अमला होना अनिवार्य है। इसके साथ ही मरीजों की चौबीसों घंटे देखरेख के लिए कम से कम 3 से 5 नर्सिंग स्टाफ की तैनाती का नियम है, ताकि अस्पताल में आने वाले किसी भी आपातकालीन मरीज को समय पर इलाज मिल सके। लेकिन औंधी के इस बदहाल अस्पताल में नियमों को ताक पर रख दिया गया है और पूरा का पूरा स्वास्थ्य केंद्र वर्तमान में मात्र 1 नर्सिंग स्टाफ के भरोसे सिसक रहा है। एक अकेले कर्मचारी के सिर पर पूरे क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था का बोझ डाल दिया गया है, जिसके कारण साप्ताहिक बाजार के दिन इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे स्थानीय ग्रामीणों को मामूली इलाज के लिए भी दर-दर भटकना पड़ा और वे बेबस नजर आए।अस्पताल की यह बदहाली सिर्फ दिन के समय तक ही सीमित नहीं है, बल्कि रात होते ही यहाँ की स्थिति और भी ज्यादा डरावनी हो जाती है। सूत्रों के हवाले से यह बेहद चौंकाने वाली जानकारी निकलकर सामने आ रही है कि रात के समय इस अस्पताल में कोई भी नर्सिंग स्टाफ या जिम्मेदार चिकित्सा कर्मी मौजूद नहीं रहता है। सूरज ढलते ही पूरे अस्पताल को मात्र एक चौकीदार के भरोसे छोड़ दिया जाता है। ऐसे में यदि रात के वक्त क्षेत्र के किसी ग्रामीण की तबीयत अचानक बिगड़ जाए, या कोई आपातकालीन स्थिति निर्मित हो जाए, तो उसे प्राथमिक उपचार मिलना भी नामुमकिन है। भौगोलिक दृष्टि से औंधी एक बेहद संवेदनशील, वनांचल और दूरस्थ इलाका है, जहाँ सर्पदंश, सड़क दुर्घटना या प्रसव जैसी आपातकालीन स्थितियां अक्सर सामने आती रहती हैं। ऐसी स्थिति में रात के वक्त अस्पताल का चौकीदार के भरोसे रहना स्थानीय जनता की जान के साथ एक बड़ा खिलवाड़ है।इस पूरी अव्यवस्था और बदहाली को लेकर जब खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) डॉ. गिरीश खोबरागड़े से बात की गई, तो उन्होंने भी विभाग की इस कमी को स्वीकार किया। हालांकि, उनके पास इस गंभीर समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं था। उन्होंने एक रटा-रटाया सरकारी जवाब देते हुए कहा कि हमारे पास अभी स्टाफ की भारी कमी है और इस पूरी स्थिति के संबंध में उच्च अधिकारियों को लिखित में जानकारी भेज दी गई है।खंड चिकित्सा अधिकारी के इस जवाब के बाद जब ‘CG LIVE NEWS 24’ की टीम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) से सीधे संपर्क करने का प्रयास किया, तो उन्होंने कॉल रिसीव करना भी मुनासिब नहीं समझा। जिले के जिम्मेदार स्वास्थ्य मुखिया का यह रवैया क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रति प्रशासनिक उदासीनता को साफ बयां करता है। जब बड़े अधिकारी ही फोन पर उपलब्ध नहीं होंगे, तो ऐसे में वनांचल की यह बदहाल व्यवस्था कैसे सुधरेगी और सोमवार के बाजार जैसे महत्वपूर्ण दिनों में ग्रामीणों को राहत कैसे मिलेगी, यह अपने आप में एक बड़ा यक्ष प्रश्न है।अधिकारियों के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये और अस्पताल की लगातार बदतर होती व्यवस्था को लेकर अब औंधी क्षेत्र की जनता में भारी आक्रोश पनप रहा है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि सरकार के सुशासन के दावे सिर्फ विज्ञापनों और बड़े-बड़े मंचों तक ही सीमित हैं, क्योंकि जमीनी हकीकत में उन्हें एम्बुलेंस और दवाइयों जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी तरसना पड़ रहा है। लगातार बिगड़ते हालातों के बीच अब यह सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या इस खबर के सामने आने के बाद सोए हुए स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की नींद टूटेगी, या फिर औंधी के इन गरीब ग्रामीणों को हमेशा की तरह उनके हाल पर ही छोड़ दिया जाएगा।















