
* जन मुक्ति मोर्चा छत्तीसगढ़ का अनिश्चितकालीन आंदोलन आखिरकार सफल रहा। प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद BSP प्रबंधन को मोर्चा की मांगों को जायज मानते हुए उन्हें एक महीने के भीतर पूरा करने का आदेश दिया गया, जिसके बाद आज 02/09/2026 को दोपहर 2 बजे आंदोलन वापस ले लिया गया।मोर्चा के सचिव बसन्त कुमार रावटे के नेतृत्व में सैकड़ों ठेका श्रमिक 01/09/2026 को सुबह 4 बजे से दल्ली माइंस के गेट नंबर 1 और 2 के सामने हड़ताल पर बैठे थे।*क्या थी वजह?*22 जुलाई को हुई हड़ताल के दौरान तहसीलदार ने 20 दिन में मांगों के निराकरण का लिखित आश्वासन दिया था। जुलाई और अगस्त बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने से श्रमिकों में आक्रोश था।मोर्चा की प्रमुख 4 मांगें थीं:*1.* ठेका श्रमिकों को तत्काल सुरक्षा प्रशिक्षण दिया जाए।*2.* निधन, सेवानिवृत्त या अन्य कारणों से रिक्त पदों पर नए श्रमिकों की तत्काल नियुक्ति की जाए।*3.* जगन्नाथ स्टील प्लांट में समझौते के अनुसार सभी मजदूरों को काम दिया जाए।*4.* देव माइनिंग और ग्रेवेटी ट्रेक्सिम (शारदा) में समान काम का समान वेतन और काम दिया जाए।कल दो बार त्रिपक्षीय बैठक बेनतीजा रहने के बाद आज सुबह 11:30 बजे अनुविभागीय अधिकारी (SDM) की अध्यक्षता में दल्ली माइंस के कॉन्फ्रेंस हॉल में निर्णायक बैठक हुई। बैठक में SDM ने BSP अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि मोर्चा की सभी चारों मांगें जायज हैं। सबसे अहम मांग – रिक्त पदों पर उसी यूनियन के नए मजदूरों को रखना – एक महीने के अंदर पूरा करने का आदेश दिया गया।प्रशासन की इस पहल पर मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने सहमति जताते हुए हड़ताल समाप्ति की घोषणा की। मोर्चा ने SDM, तहसीलदार, CSP राजहरा और थाना प्रभारी राजहरा का आभार व्यक्त किया।इस आंदोलन में जीत गुहा नियोगी, मूलचंद चंदेल, महेंद्र गंजिर, पवन विश्वकर्मा, संजय सिंह, रूपा साहू, खिलावन कुंजाम सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।















