October 29, 2026

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नक्सल का साया छंटा, पर शिक्षा का ‘वनवास’ कायम: 100 किमी का लंबा सफर तय करने पर मजबूर छात्र; क्या उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा करेंगे औंधी के युवाओं का सवेरा?

Mohla Manpur : CG LIVE NEWS 24 : मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिला, जो कभी अति-संवेदनशील गलियारों के लिए जाना जाता था, आज शांति और सुरक्षा की ओर तेजी से कदम बढ़ा चुका है। लेकिन विडंबना देखिए कि नक्सली साया छंटने के बाद भी यहाँ के उच्च शिक्षा विभाग का रवैया नहीं बदला है। सुरक्षा और व्यवस्था का बहाना बनाकर औंधी कॉलेज के सैकड़ों छात्रों को आज भी परीक्षा देने के लिए 100 किलोमीटर का दुर्गम और लंबा सफर तय करने पर मजबूर किया जा रहा है।इसी बीच रविवार 6 अक्टूबर की शाम वनांचल के युवाओं की निगाहें प्रदेश के उच्च शिक्षा एवं कैबिनेट मंत्री टंक राम वर्मा के दो दिवसीय जिले के दौरे पर टिक गई हैं। मंत्री टंक राम वर्मा 6 अक्टूबर को मोहला पहुंचे हैं और सोमवार, 7 अक्टूबर को वे मोहला के ऐतिहासिक दशहरा मैदान में जिला स्तरीय ‘विकसित भारत संकल्प कार्यक्रम’ के तहत आयोजित ‘सेवा ज्योति यात्रा’ में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। इस दौरे के बीच सबसे बड़ा सवाल औंधी के शासकीय नवीन महाविद्यालय का उभरकर सामने आया है, जो लंबे समय से समाचार पत्रों की सुर्खियों में बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि वनांचल के प्रवास पर पहुंचे उच्च शिक्षा मंत्री क्या औंधी के छात्रों के इस वर्षों पुराने दर्द को समझेंगे और क्या उन्हें स्थानीय स्तर पर ही परीक्षा केंद्र की सौगात मिल सकेगी?

औंधी महाविद्यालय की स्थापना हुए सालों बीत चुके हैं, लेकिन यहाँ के छात्र आज भी प्रशासनिक संवेदनहीनता और सियासी उदासीनता की दोहरी मार झेलने को मजबूर हैं। विडंबना की पराकाष्ठा यह है कि औंधी स्वयं एक पूर्ण तहसील मुख्यालय है, जहां शासन-प्रशासन के तमाम महत्वपूर्ण अंग (थाना, तहसील कार्यालय और राजस्व विभाग) पूरी मुस्तैदी के साथ तैनात हैं। इसके बावजूद कॉलेज परीक्षा देने के लिए यहाँ के छात्रों को आज भी 40 से 50 किलोमीटर दूर यानी आने-जाने का कुल 100 किलोमीटर का थकाऊ सफर तय करके मानपुर की शरण लेनी पड़ती है। परीक्षा की पहली पाली में शामिल होने के लिए दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आने वाली छात्राओं को भोर में तड़के ही अपने घरों से निकलना पड़ता है, जो उनके स्वास्थ्य और समय दोनों के लिहाज से एक बड़ी मानसिक व शारीरिक परीक्षा बन जाता है।

जब भी औंधी में परीक्षा केंद्र की मांग उठती है, तो प्रशासनिक अधिकारी सुरक्षा और प्रश्नपत्रों की गोपनीयता का पुराना बहाना बनाकर पल्ला झाड़ लेते हैं। लेकिन इस तर्क की धज्जियां तब उड़ जाती हैं जब यह बात सामने आती है कि औंधी के शासकीय स्कूलों में हर साल 10वीं और 12वीं की राज्य स्तरीय बोर्ड परीक्षाएं बेहद सफलता और सुरक्षा के साथ आयोजित होती हैं। यही नहीं, बोर्ड परीक्षाओं के अति-संवेदनशील प्रश्नपत्र औंधी थाने में ही सुरक्षित रखे जाते हैं और तहसील प्रशासन की सीधी निगरानी में पूरी परीक्षा संपन्न कराई जाती है। इसके अलावा नवोदय प्रवेश जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं भी सालों से औंधी में बिना किसी बाधा के आयोजित हो रही हैं।जब क्षेत्र अब पूरी तरह शांत है और बोर्ड तथा नवोदय जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं के लिए औंधी का सुरक्षा तंत्र पूरी तरह ‘उपयुक्त’ है, तो उच्च शिक्षा विभाग को अपनी ही पुलिस व्यवस्था और तहसील प्रशासन पर भरोसा क्यों नहीं है? कॉलेज के छात्रों के लिए औंधी अचानक ‘अयोग्य’ कैसे हो जाता है?

अधिकारी अक्सर “कॉलेज भवन निर्माणाधीन है” का रटा-रटाया राग अलापते रहते हैं। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि वैकल्पिक व्यवस्था के तहत साल भर औंधी में ही कॉलेज की नियमित कक्षाएं संचालित की जाती हैं। वर्तमान में यहाँ 2 रेगुलर प्रोफेसर और एक बाबू पदस्थ हैं जो शैक्षणिक कार्य संभाल रहे हैं। जब छात्र साल भर औंधी में बैठकर पढ़ाई कर सकते हैं और प्रोफेसर पढ़ा सकते हैं, तो महज 15 से 20 दिनों की परीक्षा आयोजित करने में प्रशासन को कौन सी ‘हिमालयी बाधा’ नजर आती है? भवन निर्माण में देरी अधिकारियों और ठेकेदारों की नाकामी है, लेकिन इसका हर्जाना गरीब छात्र 100 किमी की दूरी तय करके क्यों चुकाएं?

7अक्टूबर को मोहला के दशहरा मैदान में जब उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ‘सेवा ज्योति यात्रा’ के मंच से प्रदेश के विकास और युवाओं के सशक्तिकरण का संदेश देंगे, तब औंधी के सैकड़ों छात्र-छात्राएं आस भरी नजरों से उनकी ओर देख रहे होंगे। छात्र सालों से मांग कर रहे हैं, ज्ञापन सौंप रहे हैं और आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन उनकी फाइलें कलेक्ट्रेट के कमरों में धूल फांक रही हैं। अब जबकि स्वयं उच्च शिक्षा विभाग के मुखिया जिले के प्रवास पर हैं, तो वनांचल के युवाओं की उम्मीदें चरम पर हैं। क्या मंत्री जी इस प्रशासनिक हठधर्मिता पर कड़ा संज्ञान लेते हुए औंधी में ही वैकल्पिक परीक्षा केंद्र की घोषणा करेंगे, या फिर इन युवाओं की यह ‘अग्निपरीक्षा’ यूँ ही जारी रहेगी? इस सवाल का जवाब 7 अक्टूबर के इस भव्य कार्यक्रम के मंच से तय होगा।

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