मनेन्द्रगढ़/एमसीबी ( CG LIVE NEWS 24 ) ।मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में नवविवाहित जोड़ों को वितरित किए गए मंगलसूत्रों की गुणवत्ता को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। एमसीबी (मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर) जिले के खड़गवां विकासखंड अंतर्गत चनवारीडांड में हाल ही में आयोजित हुए सामूहिक विवाह के बाद कुछ हितग्राहियों ने चांदी के नाम पर दिए गए मंगलसूत्रों की शुद्धता और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। हितग्राहियों की इस आपत्ति के बाद यह मामला राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तेजी से गरमा गया है। इस मुद्दे को लेकर क्षेत्र के पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने सीधे तौर पर भाजपा सरकार और महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने इस संबंध में एक तीखा बयान जारी करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना राज्य सरकार की एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण सामाजिक योजना है, जिसका एकमात्र उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को उनके विवाह के अवसर पर सम्मानजनक सहयोग प्रदान करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि इस योजना के तहत चांदी के नाम पर बेटियों को नकली या अत्यंत निम्न गुणवत्ता वाले मंगलसूत्र बांटे गए हैं, तो यह न केवल सरकारी धन के खुले दुरुपयोग का मामला है, बल्कि उन गरीब बेटियों के सम्मान और अटूट विश्वास के साथ भी बड़ा खिलवाड़ है। कमरो ने कहा कि शासकीय योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पूरी पारदर्शिता और उच्च गुणवत्ता के साथ पहुंचना चाहिए, लेकिन यदि धरातल पर ऐसी गंभीर शिकायतें आ रही हैं तो यह पूरी प्रशासनिक व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।
महिला एवं बाल विकास विभाग पर निशाना साधते हुए पूर्व विधायक ने कहा कि इस विभाग में पूर्व में भी विभिन्न प्रकार की शिकायतें और वित्तीय अनियमितताओं के मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद विभागीय व्यवस्था में कोई अपेक्षित सुधार देखने को नहीं मिल रहा है। उन्होंने सरकार और जिला प्रशासन से कई तीखे सवाल पूछते हुए कहा कि सरकार को यह तुरंत स्पष्ट करना चाहिए कि इन संदिग्ध मंगलसूत्रों की खरीदी किस प्रक्रिया के तहत की गई थी? इसकी आपूर्ति करने वाली एजेंसी कौन थी? और वितरण से पहले सामग्री के गुणवत्ता परीक्षण व सत्यापन (वेरिफिकेशन) की जिम्मेदारी किस अधिकारी के पास थी? वितरण से पहले जांच न होना विभागीय लापरवाही को दर्शाता है।
गुलाब कमरो ने मांग की है कि इस पूरे कथित घोटाले की किसी स्वतंत्र एजेंसी या न्यायिक स्तर पर उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से उनके पद से हटाया जाए ताकि वे जांच प्रक्रिया को प्रभावित न कर सकें। इसके अलावा उन्होंने मांग की कि जिन भी नवविवाहित कन्याओं को संदिग्ध गुणवत्ता के मंगलसूत्र मिले हैं, उन्हें शासन द्वारा अविलंब मानक गुणवत्ता के वास्तविक चांदी के मंगलसूत्र नए सिरे से उपलब्ध कराए जाएं। कमरो ने साफ किया कि बेटियों के अधिकारों और उनके सम्मान से कोई भी समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा, और कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे पर प्रभावित गरीब परिवारों को न्याय दिलाने के लिए लगातार आवाज बुलंद करती रहेगी। बहरहाल, इस पूरे मामले में अब तक महिला एवं बाल विकास विभाग या जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, और क्षेत्र की जनता की निगाहें अब शासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।















