Search
Close this search box.

डिजिटल इंडिया का जनाजा: नवागांव में Jio का ‘सिग्नल स्कैम’, 3 डंडी नेटवर्क पर भी कॉल फेल; इंटरनेट के लिए रात 1 बजे तक ‘रतजगा’ को मजबूर ग्रामीण

औंधी : देश को 5G की रफ़्तार से दौड़ाने और हर गांव को ‘डिजिटल विलेज’ बनाने के सरकार के ऊंचे-ऊंचे दावों की जमीनी हकीकत देखनी हो, तो जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी के औंधी तहसील अंतर्गत आने वाले ग्राम नवागांव का रुख कीजिए। यहाँ संचार क्रांति केवल कागजों तक सीमित है, जबकि धरातल पर जियो कंपनी का नेटवर्क सफेद हाथी साबित हो रहा है। CG LIVE NEWS 24 की टीम ने जब नवागांव पहुंचकर जमीनी हकीकत परखी, तो चौंकाने वाला ‘सिग्नल स्कैम’ उजागर हुआ। गांव में मोबाइल स्क्रीन पर नेटवर्क की 3 से 4 डंडियां तो शान से चमकती हैं, लेकिन जैसे ही कोई उपभोक्ता कॉल करता है, वह ‘कॉल फेल्ड’ या ‘नेटवर्क बिजी’ के शोर में खो जाता है। डिजिटल इंडिया के इस दौर में नवागांव के ग्रामीणों के लिए एक कॉल करना भी लॉटरी लगने जैसा है।

नवागांव के जागरूक ग्रामीण हेमंत मेश्राम जगदीश बोराडे और योगेश बोराडे साथी अन्य ग्रामीण ने अपनी व्यथा सुनाते हुए मोबाइल स्क्रीन दिखाई, जिसमें सिग्नल भरपूर था, लेकिन इंटरनेट और कॉल पूरी तरह ठप थे। उन्होंने आक्रोशित स्वर में बताया कि यह केवल आंखों का धोखा है, जिसे कंपनी ने तकनीकी चालाकी से खड़ा किया है। ग्रामीणों का आरोप है कि रिलायंस जियो कंपनी उपभोक्ताओं की जेब तो मोटी रकम से काट रही है, लेकिन सेवा के नाम पर उन्हें ‘ठेंगा’ दिखा रही है। बात करते-करते आवाज का कटना, सर्वर डाउन रहना और घंटों तक इंटरनेट का न चलना यहाँ की नियति बन चुकी है। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से CG LIVE NEWS 24 को बताया कि इस समस्या ने उनके जीवन को नरक बना दिया है।

इस ‘डिजिटल अंधेरगर्दी’ का सबसे बुरा असर गांव के युवाओं और छात्रों पर पड़ रहा है। CG LIVE NEWS 24 की पड़ताल में यह शर्मनाक सच सामने आया कि नवागांव के युवाओं को इंटरनेट का उपयोग करने के लिए रात के 1 बजने का इंतज़ार करना पड़ता है। जब पूरा देश गहरी नींद में सो रहा होता है, तब यहाँ का युवा हाथ में मोबाइल लेकर किसी ऊंचे चबूतरे या छत पर इंटरनेट के सिग्नल ढूंढ रहा होता है, ताकि वह पढ़ाई कर सके, नौकरी का फॉर्म भर सके या जरूरी फाइल डाउनलोड कर सके। दिन के समय नेटवर्क की रफ़्तार 2G से भी बदतर होती है, जिससे ऑनलाइन क्लास लेना या कोई भी डिजिटल काम करना असंभव है। क्या वनांचल के युवाओं का भविष्य इसी ‘रतजगा’ की भेंट चढ़ेगा?

ग्रामीणों ने जियो कंपनी पर एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका मानना है कि मोबाइल नेटवर्क को जानबूझकर इतना घटिया रखा जा रहा है ताकि लोग परेशान होकर और अपनी मजबूरी के चलते हजारों रुपये खर्च कर ‘जियो एयर फाइबर’ लगवाने के लिए विवश हो जाएं। एक तरफ जहाँ ग्रामीण 200-300 रुपये का रिचार्ज भारी मुश्किल से करा पाते हैं, वहां उन पर 5 से 10 हजार रुपये का फाइबर सेटअप थोपा जा रहा है। यह उन गरीब परिवारों के साथ सरासर लूट है जो बड़ी मुश्किल से संचार की दुनिया से जुड़े थे। बिना फाइबर के नवागांव में कोई भी काम समय पर पूरा नहीं हो रहा, जिससे मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों की कमर टूट रही है।

इस पूरे मामले में सबसे शर्मनाक भूमिका स्थानीय शासन और प्रशासन की रही है। ITBP कैंप की मौजूदगी और क्षेत्र का लगातार हो रहा विकास इस बात की तस्दीक करता है कि नवागांव सामरिक और व्यापारिक दृष्टि से कितना महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद, जिला प्रशासन और दूरसंचार विभाग ने इस समस्या से पूरी तरह आँखें मूंद ली हैं। व्यापारी बदल और आलोक मंडल ने बताया कि डिजिटल इंडिया के दौर में यहाँ दुकानों पर UPI पेमेंट (PhonePe/GPay) करना एक सपना बन गया है। सर्वर डाउन होने के कारण अक्सर ग्राहक और दुकानदार के बीच विवाद की स्थिति बन जाती है। प्रशासन की यह निष्क्रियता न केवल विकास को बाधित कर रही है, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों के संचार में भी सेंध लगा सकती है।

हमारी टीम की पड़ताल यह साफ करती है कि नवागांव में नेटवर्क की समस्या प्राकृतिक नहीं, बल्कि कंपनियों की लापरवाही और प्रशासन की अनदेखी का नतीजा है। CG LIVE NEWS 24 इस मुद्दे को अंजाम तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हम जिला कलेक्टर और संचार मंत्रालय से अपील करते हैं कि इस ‘डिजिटल अंधेरगर्दी’ को तुरंत खत्म किया जाए। यदि तत्काल प्रभाव से टावर की क्षमता नहीं बढ़ाई गई और सिग्नल की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ, तो नवागांव के युवा और ग्रामीण उग्र प्रदर्शन के साथ-साथ ‘सिम छोड़ो’ अभियान चलाने को मजबूर होंगे। जनता के हक की इस लड़ाई में हम नवागांव के साथ खड़े हैं।

Leave a Comment