*दल्ली राजहरा।* माँ झरन मैय्या मंदिर दल्ली राजहरा का सबसे प्राचीन मंदिर है। मंदिर के दोनों छोरों पर प्राकृतिक झरनों का अथाह खजाना है। बीच में पत्थर के चबूतरे पर प्राचीन शिवलिंग, नंदी बैल और सैकड़ों राजा-महाराजाओं व सैनिकों की मूर्तियां स्थापित थीं। देखरेख के अभाव में कई प्राचीन मूर्तियां गायब हो गईं। कभी यही झरने दल्ली राजहरा के लोगों के लिए पीने के पानी और निस्तारी का एकमात्र साधन थे।वार्ड 10, 12, 18 के लोगों ने मंदिर निर्माण के लिए माँ झरन मैय्या जनकल्याण समिति का गठन किया। प्रथम अध्यक्ष रमेश मित्तल 13 साल तक अध्यक्ष रहे और वर्तमान में संरक्षक व मंदिर प्रभारी हैं। उनके कार्यकाल में जनसहयोग से 2007 में मंदिर का निर्माण पूर्ण हुआ और बनारस के पंडितों द्वारा चैत्र नवरात्रि में माँ गंगा और नवदुर्गा की मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा की गई। गंगा मैय्या की मूर्ति तत्कालीन नगर निरीक्षक एस.आर. पठारे ने बनवाकर दी थी।तब से यहां हर साल दोनों नवरात्रों में मनोकामना ज्योति प्रज्वलित होती है। इस वर्ष 41वीं नवरात्रि में कुल 55 ज्योति प्रज्वलित हुईं, जिनमें 9 घी और 46 तेल की हैं। साल में तीन बार विशाल भंडारे का आयोजन होता है।*कार्यक्रम:* 18 अक्टूबर 2026 को शाम 4.30 बजे महाष्टमी हवन, 19 अक्टूबर को सुबह 11.30 बजे महानवमी हवन, दोपहर 12.30 बजे से रात 10 बजे तक विशाल भंडारा और शाम 5 बजे ज्योति विसर्जन होगा। नगर के सभी मंदिरों की ज्योत और सावन में कांवड़ियों का जल इसी कुंड से लिया जाता है।समिति के संरक्षक रमेश मित्तल ने बताया कि प्राकृतिक झरनों को सुरक्षित रखने के लिए समिति दिसंबर तक नगरपालिका, बीएसपी और जिला प्रशासन का इंतजार करेगी। इसके बाद भी विकास कार्य शुरू नहीं हुआ तो मोहल्लेवासियों के साथ घेराव किया जाएगा और फिर बिलासपुर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की जाएगी।इस अवसर पर अध्यक्ष महेश सहारे, उपाध्यक्ष प्रीतम साहू, सचिव नरोत्तम सागर, मनीष पाठक, सोहन भारद्वाज, अरुण अरोरा सहित महिला समिति के सदस्य मौजूद रहे।














