प्रफुल कुमार बोरकर ( CG LIVE NEWS 24 ) औंधी । मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के औंधी क्षेत्र में एक बार फिर बाघ की मौजूदगी को लेकर ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। वन परिक्षेत्र दक्षिण मानपुर अंतर्गत मेंढ़ा गांव से लगे जंगल में बाघ द्वारा गाय के बछड़े का शिकार किए जाने की घटना सामने आई है। 14 अक्टूबर को दोपहर के समय खेत की ओर गए ग्रामीणों ने बछड़े को मृत अवस्था में देखा। घटना की जानकारी सामने आने के बाद आसपास के ग्रामीणों में भय का माहौल है। वहीं, वन विभाग की टीम ने बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए जंगल में ट्रैप कैमरा लगाया है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, मेंढ़ा गांव के आसपास का क्षेत्र जंगल से लगा हुआ है। यहां ग्रामीण खेती-किसानी और अन्य दैनिक कार्यों के लिए खेतों की ओर आते-जाते रहते हैं। इसी दौरान खेत की तरफ गए ग्रामीणों की नजर गाय के बछड़े पर पड़ी, जिसका बाघ द्वारा शिकार किए जाने की जानकारी सामने आई। घटना के बाद ग्रामीणों के बीच बाघ की आवाजाही को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। जंगल से लगे खेतों में काम करने वाले लोगों और मवेशियों को चराने के लिए जाने वालों की चिंता बढ़ गई है। हालांकि, बाघ की गतिविधियों, उसके घटनास्थल पर आने के समय और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि वन विभाग से किया जाना आवश्यक है।

पहले भी कई गांवों के आसपास सामने आई थी बाघ की मौजूदगी
औंधी क्षेत्र में बाघ की गतिविधियों को लेकर ग्रामीणों की चिंता नई नहीं है। कुछ दिन पहले भी घोटियाकनहार, बागडोंगरी, गट्टेपायली और हालेपायली सहित विभिन्न गांवों के आसपास बाघ की मौजूदगी और गतिविधियों को लेकर ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ था। इन क्षेत्रों में बाघ की आवाजाही की चर्चाओं के बीच लोग अपने खेतों, मवेशियों और परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहे हैं। अब मेंढ़ा गांव से लगे जंगल में गाय के बछड़े के शिकार की घटना सामने आने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।जंगल से सटे गांवों में बड़ी संख्या में ग्रामीण खेती-किसानी, मवेशियों की देखभाल और जंगल पर निर्भर दैनिक जरूरतों के लिए घरों से बाहर निकलते हैं। ऐसे में बाघ जैसे वन्यजीव की मौजूदगी की सूचना मिलने पर लोगों के मन में स्वाभाविक रूप से डर पैदा होता है। विशेष रूप से सुबह और शाम के समय खेतों की ओर जाने वाले ग्रामीणों तथा मवेशियों को चराने के लिए जंगल के आसपास पहुंचने वाले लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।
वन विभाग ने लगाया ट्रैप कैमरा, बाघ की गतिविधियों पर रहेगी नजर
मेंढ़ा गांव से लगे जंगल में बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वन विभाग की टीम द्वारा ट्रैप कैमरा लगाया गया है। ट्रैप कैमरा वन्यजीवों की आवाजाही को रिकॉर्ड करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसके माध्यम से जंगल में आने-जाने वाले वन्यजीवों की तस्वीरें और गतिविधियों से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने में मदद मिल सकती है। कैमरे से मिलने वाले रिकॉर्ड के आधार पर वन विभाग क्षेत्र में बाघ की आवाजाही और उसकी गतिविधियों का आकलन कर सकता है।

हालांकि, कैमरे में बाघ की तस्वीर या वीडियो रिकॉर्ड हुआ है या नहीं, इस संबंध में फिलहाल आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि कैमरे के माध्यम से बाघ की गतिविधियों की स्पष्ट जानकारी मिलेगी और वन विभाग आगे की आवश्यक कार्रवाई कर सकेगा। ऐसे मामलों में वन विभाग की निगरानी, समय पर सूचना और ग्रामीणों के साथ समन्वय महत्वपूर्ण माना जाता है।
ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
बाघ की मौजूदगी की आशंका और मवेशियों के शिकार की घटनाओं से जंगल से लगे गांवों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ जाती है। ग्रामीणों के लिए खेतों में काम करना, मवेशियों को चराना और जंगल के आसपास से गुजरना दैनिक जीवन का हिस्सा है। ऐसे में वन्यजीवों की आवाजाही को लेकर स्पष्ट जानकारी मिलना जरूरी है, ताकि लोग बिना अनावश्यक भय के सावधानी बरत सकें और किसी संभावित खतरे से बच सकें।ग्रामीणों को चाहिए कि वे जंगल के भीतर अकेले जाने से बचें, विशेषकर ऐसे स्थानों पर जहां बाघ की मौजूदगी की सूचना मिली हो। बच्चों को जंगल और झाड़ियों के आसपास अकेले न जाने दें तथा मवेशियों को चराने के दौरान सतर्क रहें। यदि किसी को बाघ दिखाई देता है, तो उसके करीब जाने, पीछा करने, उसे घेरने या फोटो-वीडियो बनाने के लिए जोखिम उठाने से बचना चाहिए। ऐसी स्थिति में सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए तत्काल वन विभाग को सूचना देना उचित होगा।

वन्यजीवों की निगरानी और ग्रामीण सुरक्षा के महत्व को फिर से सामने ला दिया है। घोटियाकनहार, बागडोंगरी, गट्टेपायली और हालेपायली सहित विभिन्न गांवों के आसपास पहले भी बाघ की मौजूदगी को लेकर चिंता रही है। अब मेंढ़ा गांव से लगे जंगल में गाय के बछड़े के शिकार की घटना के बाद वन विभाग की निगरानी पर लोगों की नजर है।फिलहाल वन विभाग द्वारा लगाए गए ट्रैप कैमरे से मिलने वाली जानकारी महत्वपूर्ण हो सकती है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि विभाग बाघ की गतिविधियों पर लगातार नजर रखेगा और आवश्यकता के अनुसार सुरक्षा संबंधी कदम उठाएगा। वहीं, क्षेत्र के लोगों के लिए जरूरी है कि वे किसी भी वन्यजीव की मौजूदगी की सूचना जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाएं और अफवाहों से बचें।मेंढ़ा गांव से लगे जंगल में बछड़े के शिकार की घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि जंगल से लगे गांवों में रहने वाले ग्रामीणों और उनके मवेशियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निगरानी एवं जागरूकता को किस तरह मजबूत किया जाए। अब सभी की नजर वन विभाग की आगे की कार्रवाई और ट्रैप कैमरे से मिलने वाली जानकारी पर बनी हुई है।














