मोहला। छत्तीसगढ़ के नवगठित जिले मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी अंतर्गत आने वाले पांचवीं अनुसूची और पेशा क्षेत्र मोहला में निजी तौर पर अत्यधिक ब्याज दर पर कर्ज देकर ग्रामीणों का शोषण करने का एक गंभीर मामला सामने आया है। क्षेत्र में ऊंची ब्याज दरों पर अवैध रूप से पैसे उधार देने और जबरन वसूली को लेकर हड़कंप मच गया है। पीड़ितों की शिकायत के अनुसार, जोंक की तरह साहूकार ग्रामीणों और भोले-भाले आदिवासियों का आर्थिक और मानसिक शोषण कर रहे हैं, जिससे तंग आकर कई लोग अपनी जमीन तक बेचने को मजबूर हो गए हैं। इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब दो पीड़ित कर्जदारों ने अनुविभागीय दंडाधिकारी (राजस्व) मोहला के समक्ष लिखित आवेदन देकर एक महिला साहूकार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई और प्रशासन से त्वरित जांच तथा राहत की गुहार लगाई।प्रशासन को दी गई शिकायतों में मोहला के फव्वारा चौक स्थित ‘गुप्ता दुकान’ की संचालिका कल्पना गुप्ता (पति प्रतीक गुप्ता) पर बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पहले आवेदन में मोहला निवासी एक कपड़ा व्यवसायी महिला ने बताया कि उसने लगभग एक साल पहले अपनी दुकान के सामान के लिए 20 हजार रुपये उधार लिए थे, जिस पर 1 हजार रुपये प्रति सप्ताह का ब्याज तय किया गया था। मूलधन से दोगुनी राशि ब्याज के रूप में चुका देने के बावजूद खाता बंद नहीं किया गया और अब साहूकार द्वारा मूलधन व ब्याज के नाम पर 50 हजार रुपये की भारी-भरकम राशि की मांग की जा रही है। वहीं दूसरे मामले में एक अन्य ग्रामीण ने 10 हजार रुपये का कर्ज लिया था, जिस पर 500 रुपये प्रति सप्ताह ब्याज वसूला जा रहा था। लगातार ब्याज देने के बाद भी कर्ज समाप्त नहीं हुआ और गारंटी के तौर पर पीड़ित की स्कूटी का आरसी (RC) कार्ड भी गिरवी रख लिया गया है।शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कर्ज देने से पहले ही मजबूरी का फायदा उठाकर पीड़ितों से कोरे स्टाम्प पेपर और कोरे चेक पर हस्ताक्षर करवा लिए जाते हैं। यदि कोई ग्रामीण इस अत्यधिक ब्याज दर को देने में असमर्थ होता है, तो कोरे चेक में मनमानी राशि भरकर उसे बाउंस कराने, पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने, गुंडों से धमकाने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का खेल खेला जाता है। चिलमटोला सहित आसपास के कई ग्रामीण इस साहूकारी जाल में फंसकर अपनी जमीनों से हाथ धो बैठे हैं।मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिला भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा अनुसूचित क्षेत्र (पांचवीं अनुसूची) के रूप में अधिसूचित है। कानूनी प्रावधानों के अनुसार, छत्तीसगढ़ सरकार ने साहूकारी अधिनियम, 1934 में 2010 के संशोधन के जरिए अनुसूचित क्षेत्रों में निजी मनी-लेंडिंग (साहूकारी) को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। अनुसूचित क्षेत्रों में किसी भी निजी व्यक्ति या एजेंसी को मनी-लेंडिंग का लाइसेंस जारी नहीं किया जा सकता। अधिनियम की धारा 11-F के तहत बिना वैध पंजीकरण के कर्ज देने का व्यवसाय करना दंडनीय अपराध है, जिसमें दो साल तक की सजा और 10 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। इसके अलावा, पेसा कानून के तहत केवल RBI और SEBI से पंजीकृत वित्तीय संस्थाएं ही अनुसूचित क्षेत्रों में वित्तीय लेन-देन कर सकती हैं। ग्राम सभा की बिना पूर्व अनुमति या जानकारी के किया गया कोई भी ब्याज का लेन-देन पूरी तरह अवैध माना जाएगा और किसी भी स्थिति में कुल ब्याज की राशि मूलधन से अधिक नहीं हो सकती।मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन और स्थानीय ग्राम पंचायत हरकत में आ गए हैं। SDM मोहला हेमेंद्र भूआर्य ने शिकायत आवेदन मिलने की पुष्टि करते हुए बताया कि संबंधित पक्ष को नोटिस तामील कर मामले की पूरी जांच कराई जाएगी और जांच के बाद नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं ग्राम पंचायत मोहला के सचिव कुबेर राम चोरिया ने स्पष्ट किया कि पांचवीं अनुसूची और पेसा क्षेत्र होने के कारण मोहला ग्राम पंचायत में साहूकारी प्रथा पूरी तरह प्रतिबंधित है तथा पंचायत द्वारा कोई लाइसेंस जारी नहीं किया गया है। बिना अनुमति दिया गया ऐसा कोई भी कर्ज पूरी तरह अवैध है और लेनदार को बलपूर्वक वसूली का कोई अधिकार नहीं है। फिलहाल इस मामले ने पूरे मोहला-मानपुर क्षेत्र में अवैध रूप से जड़े जमा चुके साहूकारों पर सवाल खड़े कर दिए हैं और अब सभी की नजरें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।














