
भिलाई इस्पात संयंत्र सार्वजनिक उपक्रम के नाम पर भिलाई से लेकर मरोदा, सिकोसा, गुंडरदेही, बालोद, कुसुमकसा, से दल्ली राजहरा व आस पास आदिवासी क्षेत्र के खेती जमीन, जंगल की अधिग्रहण किया। वही अब दल्ली राजहरा से रावघाट तक जमीन अधिग्रहण कर सेल के लिये लोहा लाने का सुचारू रूप से कार्य प्रारंभ करनर के बाद भिलाई इस्पात संयंत्र को अडानी को बेचने का साजिस कर रहा है। सार्वजनिक उपक्रम के नाम पर जमीन अधिग्रहण कर निजी कम्पनी को बेचा जा रहा है। निजी कम्पनी को बेचने के लिये ही जबरिया रिटायरमेंट करने की साजिस किया जा रहा है, ठेका श्रमिको को आज श्रम कानून के तहत न्यूनतम वेतन नही दिया जा रहा है, और 12 घण्टे तक कार्य कराके श्रम शोषण किया जा रहा है। मजदूर को काम से निकालने के भय दिखाकर बिना सुरक्षा के कार्य करने को मजबूर किया जा रहा है। आखिर ठेका श्रमिकों के हिस्सा की राशि को कौन ठेकेदार, दलाल ट्रेड यूनियन के नेता और बी.एस. पी. के भ्रष्ट अधिकारी खा रहे है, ठेका मजदूर जवाब चाहता है। बहुत ही जोर शोर से दलाल व बहरी नेता के जोर आजमाइस से जग्गनाथ कम्पनी द्वारा पैलेट प्लांट स्थापित किया गया है। जिसका उत्पादन क्षमता प्रति दिन लगभग चार हजार टन है। प्रतिदिन लाखो रुपया की कमाई, परन्तु वँहा कार्यरत ठेका श्रमिक को आठ से दस हजार रुपया महीने का वेतन मिलता है, इसके जिम्मेदार कौन होगा इससे निकलने वाली जानलेवा जहरीला धूल, धुंआ व प्रदूषण युक्त लाल पानी से आस पास के बस्ती व गांव को दिनों दिन उजड़ने की स्थिति बनती जा रही है। इसका जिम्मेदार कौन होगा , स्थानीय लोगो को रोजगार के भंवर जाल में फंसा कर उनसे उनका बेस कीमती खेती जमीन को छीना जाता है। बदले में बिना प्रशिक्षण , बिना सुरक्षा व बिना भविष्य निधि के हाड़तोड़ मेहनत करवा कर वेतन में निजी बाहरी मालिको को मालामाल करने की नीति भिलाई इस्पात संयंत्र कर राहा है, इसके विरोध में क्षेत्र के मजदूर पहले भी लड़े है लाठी गोली, जेल जैसे यातनाओ को झेल कर लडाई लड़ी है। वही लड़ाई जन।मुक्ति मोर्चा छत्तीसगढ़ लड़ रही है। इस लड़ाई के जन मुक्ति मोर्चा छत्तीसगढ़ क्षेत्र के न्यायप्रिय आम नागरिकों, बुद्धिजीवी पत्रकार साथी समाज व सामाजिक कार्यकर्ता व संस्था को भाग लेने का आहवान करती है।समर्थन की इस कड़ी में अभी तक सर्वआदिवासी समाज जिला बालोद, भीम आर्मी छत्तीसगढ़, छत्तीसगढिया क्रांति सेना, देवार समाज दल्ली राजहरा, मुस्लिम समाज दल्ली राजहरा















