दल्ली राजहरा।
दल्ली राजहरा में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के सीमित अवसर अब शहर के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला मंत्री एवं शिक्षक एम एस श्रीजीत ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि “शिक्षा पलायन” (शैक्षणिक प्रवासन) आज दल्ली राजहरा की घटती जनसंख्या और कमजोर होती स्थानीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण कारण बन चुका है।नगर में हिंदी एवं अंग्रेजी माध्यम के अनेक विद्यालय गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा प्रदान कर रहे हैं, लेकिन कक्षा 10वीं और 12वीं के बाद छात्रों के सामने उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा के सीमित विकल्प ही उपलब्ध हैं। बेहतर कॉलेज, प्रोफेशनल कोर्स और आधुनिक शिक्षण सुविधाओं के अभाव में हर वर्ष बड़ी संख्या में छात्र दुर्ग, रायपुर, भिलाई, बिलासपुर एवं अन्य शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। इस दौरान केवल छात्र ही नहीं, बल्कि अनेक परिवार भी अपने बच्चों के भविष्य को देखते हुए दल्ली राजहरा छोड़ रहे हैं।उन्होंने कहा कि दल्ली राजहरा में उच्च शिक्षा के नाम पर केवल एक शासकीय महाविद्यालय है, जिसकी स्थिति वर्षों से चिंताजनक बनी हुई है। आधुनिक प्रयोगशालाओं, पर्याप्त शिक्षकों, रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों और आवश्यक संसाधनों की कमी के कारण यहां प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या लगातार घट रही है। यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में महाविद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या नगण्य रह सकती है।आज तकनीकी शिक्षा की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन दल्ली राजहरा में एकमात्र शासकीय आईटीआई के अलावा न तो कोई पॉलिटेक्निक संस्थान है और न ही अन्य तकनीकी शिक्षण संस्थाएं। पूरे बालोद जिले में बी.एड. पाठ्यक्रम का अभाव भी हजारों विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं और शिक्षकीय क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवाओं के लिए बड़ी समस्या बना हुआ है। इसके अलावा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उच्च स्तरीय कोचिंग संस्थानों का अभाव भी छात्रों को बाहर जाने के लिए विवश करता है।उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए अपने बच्चों को दूसरे शहर भेजकर पढ़ाना अत्यंत कठिन हो गया है। इससे प्रतिभाशाली छात्र या तो पढ़ाई बीच में छोड़ देते हैं या आर्थिक बोझ उठाकर घर से दूर रहने को मजबूर होते हैं।श्रीजीत ने हाल ही में आयोजित राष्ट्रीय परख सर्वेक्षण का उल्लेख करते हुए कहा कि यद्यपि यह रिपोर्ट सीधे पलायन पर बात नहीं करती, लेकिन यह स्पष्ट संकेत देती है कि जहां शिक्षा की गुणवत्ता और संसाधन कमजोर होते हैं, वहां के छात्र बेहतर शिक्षा की तलाश में अपने क्षेत्र से बाहर जाने लगते हैं।उन्होंने मांग की कि दल्ली राजहरा को केवल खनन नगरी के रूप में नहीं, बल्कि शिक्षा एवं कौशल विकास केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। इसके लिए शासकीय महाविद्यालय का आधुनिकीकरण, नए तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों की स्थापना, बी.एड. कॉलेज, पॉलिटेक्निक, रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण कोचिंग सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।श्रीजीत ने कहा कि यदि समय रहते इस दिशा में ठोस पहल नहीं की गई तो दल्ली राजहरा से युवाओं का पलायन लगातार बढ़ता रहेगा, जिसका सीधा असर शहर की जनसंख्या, व्यापार, सामाजिक विकास और भविष्य पर पड़ेगा। वहीं यदि बेहतर उच्च शिक्षा संस्थान विकसित किए जाएं तो आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थी दल्ली राजहरा आकर शिक्षा ग्रहण करेंगे, जिससे शहर की आर्थिक गतिविधियां, रोजगार और समग्र विकास को नई गति मिलेगी।















