
-प्रातःकालीन सत्र में तथागत गौतम बुद्ध एवं संविधान निर्माता,सिम्बोल ऑफ़ नॉलेज,विश्व रत्न डॉ बाबा साहेब आंबेडकर के छाया चित्र के समक्ष मोमबत्ती,अगरबती प्रज्वलित कर समाज प्रमुखों द्वारा नीले और पंचशील झंडे का ध्वजारोहण किया गया। उपस्थित बौद्ध उपासक उपसिकाओ द्वारा सामूहिक बुद्ध,धम्म,संघ वंदना की गई।संध्या द्वितीय कालीन सत्र में वर्षावास के तहत धम्मग्रँथ का वाचन किया गया। इस अवसर पर अतिथिगण प्रदेश उपाध्यक्ष भारतीय बौद्ध महासभा हेमंत कांडे,प्रदेश सचिव सुरेन्द्र मेश्राम, बालोद जिला अध्यक्ष भारतीय बौद्ध महासभा दिलीप मेश्राम,बालोद जिला महिला अध्यक्ष भारतीय बौद्ध महासभा नीता कमल रामटेके,पूर्व अध्यक्ष भारतीय बौद्ध महासभा गोवर्धन रँगारी,पूर्व अध्यक्ष सम्यक बौद्ध महासभा बीएल बौद्ध,अशोक बाम्बेश्वर,डॉ टीएल बंसोड़े, कृष्णा मूर्ति रामटेके,सम्यक बौद्ध महासभा महिला मंडल अध्यक्ष चन्द्ररेखा नांदेश्वर,नगर पालिका एल्डर मेन राजेश दशोडे,सहायक महाप्रबंधक राजहरा प्रवीण रामटेके तथा अध्यक्षता सम्यक बौद्ध महासभा अध्यक्ष दिलीप सुखदेवे ने की।इस अवसर पर हेमन्त कांडे ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह दिवस भारतीय इतिहास की ऐतिहासिक धम्मक्रांति का प्रतीक है। 14 अक्टूबर 1956 को डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने अपने लाखों अनुयायियों के साथ 22 प्रतिज्ञाओं को ग्रहण करते हुए नागपुर की दीक्षाभूमि में बौद्ध धम्म की दीक्षा लेकर समाज को समानता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और न्याय का संदेश दिया था।उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध के प्रज्ञा, करुणा और मैत्री के विचार आज भी समाज के लिए प्रासंगिक हैं। हमें बाबासाहेब के विचारों को अपने जीवन मे आत्मसात करना चाहिए।इसी कड़ी में अशोक बाम्बेश्वर ने कहा कि भगवान बुद्ध का धम्म मानवता, विवेक, करुणा और नैतिकता का मार्ग दिखाता है। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने बौद्ध धम्म स्वीकार कर समाज को एक नई दिशा प्रदान की। उन्होंने कहा कि बुद्ध और डॉ बाबासाहेब के विचारों को जीवन में आत्मसात कर संकल्प लेने एवं संगठित रहने का दिन है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को बराबर सम्मान और अधिकार मिलना चाहिए। धम्म चक्र प्रवर्तन दिवस पर संस्था प्रमुख दिलीप सुखदेवे ने कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम माना। शिक्षित और जागरूक समाज ही अपने अधिकारों को समझकर छुआ छूत,अन्याय,अमानवीय तथा भेदभाव के विरुद्ध आवाज उठा सकते है।उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे शिक्षा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक एकता को अपने जीवन का मुख्य आधार बनाएं तथा भगवान बुद्ध और डॉ बाबासाहेब के विचारों को जन-जन तक पहुंचाएं।मंचस्थ अन्य वक्ताओं ने भी धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस की महत्ता पर प्रकाश डाला।कार्यक्रम का संचालन महासचिव अनिल रामटेके व आभार प्रदर्शन महिला मंडल अध्यक्ष चन्द्ररेखा नांदेश्वर ने किया।उक्त अवसर पर भीम राव मेश्राम, कमलकांत रामटेके,दिलीप रँगारी, अविनाश शेंडे,रोशन पाटिल,गौतम रामटेके,नितेश बाम्बेश्वर,संतोष सहारे, आर बी नायक,अनूप खोबरागड़े,सत्यनारायण रामटेके, प्रहलाद लोनहरे,किशोर बाम्बेश्वर,संतोष मेश्राम,देवेश मेश्राम,ज्योत्सना मेश्राम, विद्या सहारे, रितु बाम्बेश्वर, हिम लता सुखदेवे, रंजना खोब्रागडे, शारदा बाम्बेश्वर, कृष्णा गजभिये, सीमा रामटेके सहित बड़ी तादात में बौद्ध उपासक,उपसिकायें शामिल हुई।














