क्षेत्रीय विधायक इंद्रशाह मंडावी के गंभीर आरोपों और पिछले कई दिनों से चल रहे सरपंच संघ के उग्र आंदोलन के बाद आखिरकार राज्य शासन ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) भारती चंद्राकर का स्थानांतरण कर उन्हें मार्कफेड नवा रायपुर अटल नगर में अतिरिक्त प्रबंध संचालक के पद पर पदस्थ किया गया है, जिसे प्रशासनिक हलकों में लूप लाइन माना जा रहा है। वहीं, बलौदाबाजार के अपर कलेक्टर अभिषेक गुप्ता को मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिला पंचायत का नया मुख्य कार्यपालन अधिकारी नियुक्त किया गया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि सरपंच संघ के लगातार विरोध और क्षेत्रीय विधायक की नाराजगी के चलते ही शासन ने यह कदम उठाया है।इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल की पृष्ठभूमि पिछले कुछ दिनों से तैयार हो रही थी। हाल ही में क्षेत्रीय विधायक इंद्रशाह मंडावी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर सीईओ भारती चंद्राकर पर गंभीर आरोप लगाए थे।

विधायक का सीधा आरोप था कि सीईओ के कार्यकाल में जिले के भीतर ठेकेदारी तंत्र को बढ़ावा मिला, जिससे पूरी प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हुई। उन्होंने इन विकट परिस्थितियों के लिए जिले के समूचे प्रशासनिक तंत्र को भी जिम्मेदार ठहराया था। विधायक के इन आरोपों ने प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मचा दिया था, जिसके तुरंत बाद शासन स्तर पर यह निर्णय लिया गया।विधायक के आरोपों के साथ-साथ जिले भर के निर्वाचित सरपंच भी लंबे समय से संघ के माध्यम से जिला पंचायत, कलेक्ट्रेट और जनपद सीईओ की कार्यप्रणाली के विरोध में जिला मुख्यालय में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे थे। इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई थी, जब जिले के सरपंच अपनी जायज मांगों को लेकर जिला पंचायत सीईओ से मुलाकात करने गए थे। आरोप है कि उस दौरान सीईओ ने सरपंचों की मांगों को पूरी तरह नजरअंदाज करते हुए उन्हें अपमानित किया और जनप्रतिनिधियों के साथ दुर्व्यवहार किया। इतना ही नहीं, सरपंचों को डराने के लिए पंचायत की फाइलों की जांच कराने की धमकी भी दी गई थी। इस बर्ताव से आहत होकर जब सरपंच शिकायत लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे, तो वहां कलेक्टर ने उनसे मुलाकात का मौका ही नहीं दिया।प्रशासनिक उपेक्षा और दुर्व्यवहार से आक्रोशित होकर सरपंचों ने अंततः 24 जून को होने वाली अनिवार्य ग्राम सभा का पूर्ण बहिष्कार कर दिया और लगातार आंदोलन की राह पर डटे रहे। हालांकि, विधायक द्वारा लगाए गए आरोपों और सरपंचों के दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि या जांच के निष्कर्ष अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। स्थानांतरण के पीछे सरकार की ओर से क्या आधिकारिक कारण रहे हैं, इस पर संबंधित आदेश और विस्तृत बयान का इंतजार है, लेकिन नए सीईओ अभिषेक गुप्ता के पदभार ग्रहण करने के बाद ही जिले की प्रशासनिक व्यवस्था और सरपंचों के बीच का गतिरोध दूर होने की उम्मीद जताई जा रही है।















