दल्ली राजहरा। जन मुक्ति मोर्चा के नगर अध्यक्ष महेंद्र गजीर (गुड्डू) ने दल्ली राजहरा क्षेत्र के प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण एवं उनके समुचित उपयोग की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि दल्ली राजहरा का पुराना नाम “झरन दल्ली” था, जिसका कारण यहां विभिन्न स्थानों पर मौजूद प्राकृतिक झरने थे। आज भी नगर में कई स्थानों पर ऐसे जल स्रोत मौजूद हैं, जिनका उचित उपयोग नहीं हो पा रहा है।महेंद्र गजीर ने बताया कि झरन मंदिर (वार्ड क्रमांक 10), कोण्डे वार्ड (वार्ड क्रमांक 17) तथा पांच पुल के आगे-पीछे स्थित प्राकृतिक जल स्रोतों से लगातार पानी बहता रहता है। यदि इन जल स्रोतों के पानी को संरक्षित कर संग्रहित किया जाए तो इसका उपयोग नगरवासियों की जल आवश्यकताओं को पूरा करने में किया जा सकता है।उन्होंने विशेष रूप से वार्ड क्रमांक 17 में रेलवे पटरी के आगे एवं पीछे स्थित दो प्राकृतिक जल स्रोतों का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां से पानी एकत्र कर निकट स्थित शहीद अस्पताल तक पहुंचाया जा सकता है। शहीद अस्पताल में लंबे समय से पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। यह अस्पताल बालोद जिले के प्रमुख अस्पतालों में से एक है, जहां दूर-दराज क्षेत्रों से मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं तथा कम खर्च में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।महेंद्र गजीर ने कहा कि जल स्रोतों और शहीद अस्पताल के बीच की दूरी लगभग 15 से 20 मीटर है, इसलिए तकनीकी रूप से वहां पानी की आपूर्ति करना संभव है। इससे अस्पताल की जल समस्या का स्थायी समाधान निकल सकता है और नगरवासियों को भी लाभ मिलेगा।उन्होंने नगर पालिका परिषद दल्ली राजहरा से मांग की है कि प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण, संवर्धन एवं सदुपयोग के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं तथा इन स्रोतों के पानी को शहीद अस्पताल एवं शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जाए। इससे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होने के साथ-साथ जनहित में उनका बेहतर उपयोग भी सुनिश्चित होगा।















