August 15, 2026

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दुर्गम और सीमावर्ती गांव कातुलझोरा पहुंचे विधायक इंद्रशाह मंडावी, अमरैया के नीचे चौपाल लगाकर सुनीं जनसमस्याएं, देवस्थल संरक्षण के लिए सामुदायिक भवन की दी स्वीकृति

मोहला। मनोरम वादियों और दुर्गम पहाड़ी रास्तों के बीच, चारों तरफ से पहाड़ों से घिरा हुआ महाराष्ट्र की सीमा से लगा क्षेत्र का अंतिम गांव कातुलझोरा तपती दोपहरी में एक नई उम्मीद के साथ तैयार था। आम के पेड़ों (अमरैया) की घनी छांव के नीचे ग्रामीणों ने खटिया बिछाकर बैठक की तैयारी की थी, जहां पहुंचने वाले इंद्रशाह मंडावी पहले विधायक बने। रामगढ़ पंचायत के अंतर्गत आने वाले परवीडीह से करीब 3 किलोमीटर आगे पश्चिम की ओर बसे कातुलझोरा गांव में एक ही परिवार के 13 लोग बीते तीन पीढ़ियों से निवास कर रहे हैं। इस दुर्गम गांव से महज 500 मीटर की दूरी पर महाराष्ट्र की सीमा शुरू हो जाती है, जिसके बाद बोटेझर, नारकसा और बिमनकोजी जैसे गांव आते हैं, जो सीधे महाराष्ट्र के सावरगांव और मुरुमगांव से जुड़ते हैं। इतने सुदूर अंचल में पहली बार किसी जनप्रतिनिधि के पहुंचने से ग्रामीणों में भारी उत्साह देखा गया।इस दौरे की पृष्ठभूमि एक सप्ताह पहले तैयार हुई थी, जब ग्राम पटेल सुमेंद्र धुर्वे अपनी मांगों को लेकर मोहला में विधायक इंद्रशाह मंडावी से मिलने पहुंचे थे। उन्होंने मुख्य रूप से कातुलझोरा में बिजली कनेक्शन बहाल करने और पक्की सड़क निर्माण कराने की मांग रखी थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विधायक ने तत्काल विद्युत विभाग के सहायक अभियंता को दूरभाष पर निर्देशित किया था कि तीन दिनों के भीतर गांव में बिजली के मीटर लगाए जाएं। साथ ही उन्होंने वादा किया था कि मीटर लगते ही वे स्वयं कातुलझोरा का दौरा करेंगे।

ग्रामीणों के लिए बेहद सुकून की बात रही कि तय समय सीमा के भीतर गांव के घर-घर में बिजली के मीटर लगा दिए गए, जिसके लिए ग्राम पटेल ने विधायक का आभार व्यक्त करते हुए जल्द से जल्द सुचारू बिजली आपूर्ति शुरू कराने का आग्रह किया।चौपाल के दौरान स्थानीय ग्रामीण रामदास धुर्वे ने अपनी प्रशासनिक और भौगोलिक दिक्कतों को विधायक के सामने साझा किया। उन्होंने बताया कि उनकी तीन पीढ़ियां इस पहाड़ी पर संघर्षमय जीवन जी रही हैं। शासकीय योजनाओं का लाभ लेने या राशन सामग्री लेने के लिए उन्हें हर बार पहाड़ी से नीचे उतरकर मुख्यालय जाना पड़ता है। बरसात के दिनों में यह रास्ता बेहद खतरनाक हो जाता है और मुश्किलें कई गुना बढ़ जाती हैं। रोजमर्रा के सामानों की खरीदी या साप्ताहिक बाजार के लिए भी ग्रामीणों को परवीडीह का रुख करना पड़ता है। इसी दौरान ग्रामीणों ने अपनी आस्था के केंद्र देवस्थल के संरक्षण के लिए एक भवन की मांग की, जिसे गंभीरता से लेते हुए विधायक मंडावी ने मौके पर ही सामुदायिक भवन निर्माण के लिए अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी।इस ऐतिहासिक चौपाल और विधायक के प्रवास के दौरान क्षेत्र के तमाम स्थानीय जनप्रतिनिधि, ग्रामीण और प्रमुख सामाजिक पदाधिकारी मौजूद रहे। इनमें मुख्य रूप से रामगढ़ ग्राम पंचायत की सरपंच सत्तो तुलावी, उपसरपंच अशोक मांझी, जोन अध्यक्ष रसीद हुसैन, मरकाटोला सरपंच आवेन्द्र शाह, परवीडीह के पटेल अंतरसिंग हिडामे, कातुलझोरा के पटेल सुमेन सिंह धुर्वे, रामगढ़ के पटेल श्याम सिंह तुलावी और पारडी के गायता मोहन बोगा उपस्थित थे। इसके साथ ही वार्ड पंच लीला हिडामे, देवलाल मांझी, पूर्व वार्ड पंच रामसाय बोगा, जयसिंह हिडामे, धर्मेंद्र तुलावी, रामनाथ धुर्वे, बूथ अध्यक्ष धिरपाल बोगा और तिलक आतराम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन इस दौरान अपनी सहभागिता दर्ज कराने पहुंचे।

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