दल्ली राजहरा। छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ दल्ली राजहरा ने भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) के राजहरा खान समूह में कार्यरत ठेका श्रमिकों की विभिन्न लंबित समस्याओं के निराकरण की मांग को लेकर बीएसपी प्रबंधन को 8 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ के अध्यक्ष सोमनाथ उइके ने आरोप लगाया कि ठेका पद्धति से संचालित कार्यों में श्रमिक लगातार रोजगार, वेतन, चिकित्सा सुविधा और श्रम कानूनों के पालन से जुड़ी गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं।ज्ञापन में प्रमुख रूप से मांग की गई कि दल्ली माइंस जी-ब्लॉक में पिछले छह माह से बंद पड़े ठेका कार्य के कारण बेरोजगार हुए ड्राइवरों को झरनदल्ली माइंस के 46 समूह एवं दल्ली फील्ड गैरेज में रिक्त पदों पर वरिष्ठता के आधार पर तत्काल कार्य उपलब्ध कराया जाए। इसके अलावा राजहरा माइंस के क्रशर यूनिट में मेसर्स सतकरतार माइनिंग के श्रमिकों को वर्ष 2021-22 के बढ़े हुए महंगाई भत्ते की बकाया राशि का शीघ्र भुगतान करने की मांग भी उठाई गई।संघ ने आईओसी राजहरा में ठेका समाप्ति के बाद बीएसपी प्रबंधन के साथ-साथ ट्रेड यूनियनों को भी एनडीसी (NDC) प्रपत्र उपलब्ध कराने, सेवा निवृत्त ठेका श्रमिकों को 2 से 3 माह के भीतर ग्रेच्युटी का भुगतान सुनिश्चित करने तथा पुराने ठेका समाप्त होने और नए ठेका प्रारंभ होने के बीच चिकित्सा सुविधाएं बंद करने की व्यवस्था समाप्त कर आईपीआईडी (IPID) सहित सभी स्वास्थ्य सुविधाएं तत्काल बहाल करने की मांग रखी।ज्ञापन में सभी ठेका श्रमिकों का वेतन प्रत्येक माह 5 से 10 तारीख के बीच नियमित रूप से भुगतान करने, दल्ली यंत्रीकृत खान के स्लाइम्स परिवहन (हितकसा) एवं कुमार कार्गो सॉल्यूशन (क्रशर यूनिट) के कार्यों को बिना बाधित किए श्रमिकों को निरंतर रोजगार उपलब्ध कराने की भी मांग की गई।इसके अलावा मेसर्स अंसारी कंस्ट्रक्शन पर श्रमिकों की अर्जित अवकाश (EL), वार्षिक बोनस भुगतान तथा कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) अंशदान में अनियमितता बरतने का आरोप लगाते हुए इन सभी मामलों में तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की गई।ज्ञापन सौंपने के दौरान संघ के अध्यक्ष सोमनाथ उइके, महामंत्री रामचरण नेताम, कोषाध्यक्ष राजाराम बरगद, संगठन मंत्री तुलसी कोला, उपाध्यक्ष सुरेन्द्र साहू सहित राजेश, नम्मू यादव, महेश, हितेश एवं विक्की सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ ने चेतावनी दी है कि यदि ठेका श्रमिकों की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो संगठन श्रमिक हितों की रक्षा के लिए चरणबद्ध एवं उग्र आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी बीएसपी प्रबंधन की होगी।















