मोहला-मानपुर ( CG LIVE NEWS 24 ) । छत्तीसगढ़ शासन द्वारा अभी कुछ ही दिनों पहले हर विकासखंड में बड़े ही धूमधाम से ‘सुशासन तिहार’ मनाया गया, जहाँ मंचों से दावे किए गए कि सरकार की योजनाएँ हर घर तक पहुँच रही हैं। लेकिन मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले से विकास के इन दावों को झकझोरने वाली एक ऐसी जमीनी हकीकत सामने आई है जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हैरान कर दिया है। औंधी तहसील से महज तीन-चार किलोमीटर दूर स्थित ग्राम डोमिकला में पेयजल को लेकर हाहाकार मचा हुआ है और ग्रामीण पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं। गाँव की स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि जब सरकारी अमले ने सुध नहीं ली, तो ग्रामीणों को खुद आपस में चंदा इकट्ठा कर पैसा जोड़ना पड़ा और तब जाकर खराब पड़े हैंडपंप को सुधारा जा सका।जल जीवन मिशन के तहत इस गाँव में ‘हर घर जल’ पहुँचाने के बड़े-बड़े बोर्ड तो लगा दिए गए हैं,

जिसमें लाखों रुपये की लागत और ठेकेदारों के नाम चमचमा रहे हैं, लेकिन धरातल पर सच्चाई इसके ठीक उलट है। ग्रामीणों ने बताया कि घर-घर नल कनेक्शन तो दे दिए गए हैं, लेकिन उनमें आज तक पानी नहीं पहुँचा है। ठेकेदार ने आनन-फानन में काम निपटाते हुए पाइप और स्टैंड तो खड़े कर दिए, लेकिन कई घरों के नलों में पानी रोकने के लिए टोटियाँ तक नहीं लगाई गई हैं।

सरकारी कागजों में योजना को पूरा दिखाकर अधिकारी और ठेकेदार अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, जबकि हकीकत में पूरा ढांचा सिर्फ एक शोपीस बनकर रह गया है और ग्रामीण आज भी पुराने ढर्रे पर पानी के लिए भटक रहे हैं।इस पूरे मामले और भर्राशाही को लेकर जब ‘सीजी लाइव न्यूज़ 24’ की टीम ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) मोहला-मानपुर के SDO ए.पी. शर्मा से फोन पर बात की, तो उनका जवाब बेहद गैर-जिम्मेदाराना रहा। उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि वे इस संबंध में क्रेडा विभाग को अवगत कराएंगे और वहाँ के मैकेनिक को बोलकर इसे ठीक करवाएंगे। हद तो तब हो गई जब उनसे नलों में टोटियाँ गायब होने का सवाल किया गया, तो उन्होंने सारा ठीकरा ग्रामीणों पर ही फोड़ दिया। SDO ने कहा कि नलों की टोटियाँ ग्रामीणों के द्वारा ही निकाल ली गई होंगी। अधिकारियों का यह उदासीन रवैया साफ बयाँ करता है कि धरातल पर काम की क्या स्थिति है। तहसील मुख्यालय के इतने पास बसे गाँव की यह दुर्दशा सीधे तौर पर जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान है। अब देखना यह होगा कि यह पूरा मामला जिला कलेक्टर महोदय के संज्ञान में आने के बाद इन लापरवाह अफसरों और ठेकेदार पर क्या सख्त कार्रवाई होती है, या डोमिकला के ग्रामीण आगे भी ऐसे ही चंदा कर अपनी प्यास बुझाते रहेंगे।















